हिंदू परिवारों पर हमला: दरवाजे बाहर से बंद कर घरों में लगाई आग, दीवार तोड़कर बची आठ जानें

दिल्ली। बांग्लादेश के चटगांव जिले में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार तड़के करीब 3:45 बजे पश्चिम सुल्तानपुर गांव में दो हिंदू परिवारों के घरों में आगजनी कर दी गई।
आरोप है कि हमलावरों ने पहले घरों के दरवाजे बाहर से बंद किए और फिर आग लगा दी, ताकि अंदर मौजूद लोग बाहर न निकल सकें।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुखा शिल और दिहाड़ी मजदूर अनिल शिल के घरों के कुल सात कमरे पूरी तरह जलकर राख हो गए। घटना के वक्त दोनों घरों में आठ लोग मौजूद थे। रात का खाना खाने के बाद सभी गहरी नींद में थे कि अचानक धुएं और आग से उनकी आंख खुली।
बाहर निकलने की कोशिश की तो पता चला कि दरवाजे बाहर से बंद हैं। इसके बाद जान बचाने के लिए परिवार के लोगों ने बांस और टीन से बनी दीवारों को काटा और किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
अनिल शिल के बेटे मिथुन शिल ने बताया कि वह तीन महीने पहले शादी के लिए दुबई से घर लौटा था। आग में उसका पासपोर्ट, घरेलू सामान और करीब 80 से 90 हजार टका नकद जलकर खाक हो गया। घर जलने के बाद एक महिला बदहवास होकर रो पड़ी, जबकि पूरा परिवार सदमे में है।
घटना की सूचना पर उपजिला कार्यकारी अधिकारी एस.एम. रहातुल इस्लाम और सहायक आयुक्त ओंगचिंग मारमा मौके पर पहुंचे। उन्होंने नुकसान का आकलन कर पीड़ितों को तत्काल 25 किलो चावल, 5,000 टका नकद और कंबल उपलब्ध कराए तथा आगे मदद का भरोसा दिया। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है, हालांकि अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि इसी क्षेत्र के धेयूपारा और कुटिया बरुईपारा गांवों में भी कुछ दिन पहले हिंदू घरों को निशाना बनाया गया था। पिछले सप्ताह लक्ष्मीपुर सदर में एक घर को बाहर से बंद कर आग लगाने से सात साल की बच्ची जिंदा जल गई थी।
वहीं ढाका के पास भालुका में हिंदू युवक दीपू चंद्र की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





