Video: जब प्रशासन से नहीं मिली कोई मदद, तो ग्रामीण श्रमदान कर पहाड़काट सड़क बनाने को मजबूर ग्रामीण

शिव शंकर साहनी@अंबिकापुर. एक ओर शासन के निर्देश पर प्रशासन के द्वारा नागरिकों की समस्या दूर करने गांव-गांव में जन चौपाल का आयोजन किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर सरगुजा के अभावग्रस्त व पहुंचविहीन इलाके के ग्रामीण पूर्व के चौपाल, प्रशासन से लेकर शासन स्तर कई बार गुहार लगाये जाने के सुविधा नहीं मिल पाने से श्रमदान कर पहाड़काट सड़क बनाने मजबूर ग्रामीण हो रहे हैं।
सरगुजा के विकासखंड मैनपाट के मछले प्वाइंट से लेगे घाघीकोना से श्रमदान कर सड़क बनाने की यह वीडियो बताने के लिए काफी है कि सरगुजा के बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे अभावग्रस्त इलाको की क्या स्थिति है।मैनपाट के ग्राम पंचायत परपटिया के आश्रित बस्ती घाघीकोना तराई क्षेत्र में है और यहां से ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 6 किमी पहाड़ी रास्ता पैदल पार करना होता है। चुटियाकोना तक सड़क नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि घाघीकोना व चुटियाकोना बस्ती मैनपाट के तराई क्षेत्र में हैं। इस बस्ती तक पहुंचने के लिए केवल पगडंड़ी व पहाड़ी रास्ता है।गांव में आज तक पेयजल के लिए एक हैंडपंप का भी खनन नहीं हो सका है।जिससे ग्रामीण ढोढ़ी के दूषित जल का सेवन करने मजबूर हो रहे हैं।गर्मी व बारिश के सीजन में पेयजल की समस्या और बढ़ जाती है। दूषित जल के कारण आंत्रशोध सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बना रहता है।जिसकी वजह से ग्रामीणों को श्रमदान कर सड़क बनाने की मजबूरी हो गई है।
कलेक्टर ने कहा- स्वीकृति होने के बाद जल्द शुरू होगा काम
इधर मैनपाट क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरगुजा कलेक्टर संजीव कुमार झा ने कहा कि मैनपाट क्षेत्र में सड़कों का काम तेजी से किया जा रहा है..वही घाघीकोना और चुटियाकोना के सड़कों का निर्माण भी जल्द किया जाएगा। जिसका प्राक्कलन बनाकर प्रस्ताव भेजा गया है। जिसकी स्वीकृति जल्द होने के बाद इस सड़क का भी कार्य पूर्ण किया जाएगा।
श्रमदान से पहाड़ काट कच्ची सड़क बनाने के लिए मजबूर
बहरहाल इस गांव के ग्रामीण अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर लगा वे थक चुकें हैं और शासन व प्रशासन से कोई पहल नहीं किये जाने के कारण वे श्रमदान से पहाड़ काट कच्ची सड़क बनाने के लिए मजबूर हुए। बावजूद सड़क जैसी बुनियादी सुविधा साढ़े तीन सौ की आबादी प्रभावित है। जो ढोढ़ी का दूषित जल ही इनके लिए सहारा है..अब तो ग्रामीणों ने बड़े पत्थर हटाने जेसीबी के लिए दो-दो सौ रूपये किया चंदा सड़क भी तैयार कर लिया है।