डिजिटल युग में लेखक और पाठक के रिश्ते पर रायपुर साहित्य उत्सव में सार्थक संवाद

रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा ‘डिजिटल युग के लेखक और पाठक’ में बदलते समय के साथ साहित्य, लेखन और पाठकीय संस्कृति पर गंभीर विमर्श हुआ। सूत्रधार पत्रकार अनिल द्विवेदी के संचालन में हुई चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि डिजिटल माध्यम ने साहित्य के स्वरूप को बदला है, लेकिन उसकी आत्मा और रचनात्मकता आज भी उतनी ही जीवंत है।
लेखक, कवि और शिक्षक सर्वेश तिवारी ने कहा कि मुद्रित किताबों का महत्व आज भी बना हुआ है, क्योंकि उनका अनुभव ऑनलाइन माध्यम पूरी तरह नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि लेखक की सफलता का असली पैमाना पुरस्कार नहीं, बल्कि पाठकों की संख्या है। जितने अधिक पाठक, उतनी ही रचना की सार्थकता होती है।
लेखक नवीन चौधरी ने डिजिटल माध्यमों की शक्ति को रेखांकित करते हुए बताया कि इंटरनेट ने साहित्य को नया जीवन दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण वरिष्ठ लेखकों की रचनाएं नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं और पाठक वर्ग लगातार बढ़ रहा है।
प्रसार भारती की सलाहकार स्मिता मिश्रा ने कहा कि किंडल और ऑडियो बुक्स जैसे माध्यमों ने किताबों को आसान, सस्ता और सुलभ बनाया है। लेखन कभी रुका नहीं, केवल उसका रूप बदला है।
वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि इंटरनेट ने साहित्य का लोकतंत्रीकरण किया है और नए लेखकों–पाठकों को मंच दिया है। परिचर्चा का निष्कर्ष यही रहा कि डिजिटल युग साहित्य के विस्तार का नया अवसर है।





