82 साल का सुनहरा सफर थमा: 12,000 गानों की मलिका आशा भोसले नहीं रहीं

मुंबई। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और सबसे वर्सेटाइल आवाजों में शुमार आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके साथ ही सात दशकों तक चला एक स्वर्णिम संगीत युग भी मानो थम गया। महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वाली आशा का सिंगिंग करियर 82 साल लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 20 भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाकर इतिहास रचा।
महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा, महान शास्त्रीय गायक पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं और लता मंगेशकर की छोटी बहन। पिता के निधन के बाद कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और संघर्ष के बीच अपनी पहचान बनाई। शुरुआती दौर में उन्हें वे गाने मिलते थे जिन्हें अन्य गायिकाएं छोड़ देती थीं, लेकिन उन्होंने अपनी अलग शैली से खुद को स्थापित किया।
आशा भोसले को 9 Filmfare Awards समेत 100 से अधिक पुरस्कार मिले। खास बात यह रही कि उन्होंने 1979 में फिल्मफेयर नॉमिनेशन से अपना नाम वापस लेकर नई प्रतिभाओं को मौका देने की मिसाल भी पेश की।
उनकी जोड़ी ओ.पी. नैयर और आर.डी. बर्मन के साथ बेहद सफल रही। ‘नया दौर’ से लेकर ‘तीसरी मंजिल’ और ‘कारवां’ तक, उन्होंने संगीत की नई परिभाषा गढ़ी। ‘दम मारो दम’ और ‘पिया तू अब तो आजा’ जैसे गीतों ने उन्हें पॉप और वेस्टर्न स्टाइल की क्वीन बना दिया। वहीं ‘उमराव जान’ में गाई गजलों ने उनके शास्त्रीय कौशल को भी साबित किया। आशा ने मोहम्मद रफी के साथ 900 से ज्यादा और किशोर कुमार के साथ 600 से अधिक गाने गाए।
संगीत के अलावा उन्होंने ‘Asha’s’ नाम से अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट चेन भी शुरू की। मार्च 2026 में ब्रिटिश बैंड Gorillaz के साथ उनका आखिरी गाना रिलीज हुआ। आशा भोसले की आवाज, उनकी बहुमुखी प्रतिभा और प्रयोगधर्मी अंदाज आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।





