सरगुजा-अंबिकापुर

Ambikapur: जंगलों में भीषण आग,पेड़-पौधे जलकर खाक, कुभकर्णी नींद में सोया वन विभाग

शिव शंकर साहनी@अंबिकापुर। (Ambikapur) सरगुजा के जंगलों में इनदिनों लगातार आगजनी के मामलें सामने आ रहें है. जिससे पर्यावरण सहित जंगलों में निवास करने वाले जीव-जंतु का अस्तित्व खतरें में मंडराता नजर आ रहा है. यहाँ वन विभाग के सुस्त रवैए के कारण आये दिन जंगलों में भीषण आग लगने से कई पेड़-पौधें जलकर खाख हो रहें है. (Ambikapur) आपको बता दे कि सरगुजा वनमण्डल के अलग-अलग वनपरिक्षेत्रों में लगातार आगजनी की घटनाएँ सामने आ रहीं है. क्योंकि फारेस्ट डिपार्टमेंट यानी वन विभाग आगजनी रोकने के लिए अपनी मुस्तैदी जंगलों में नहीं दिखा रहीं है. यहीं कारण है कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के सुस्त रवैए से सरगुजा के जंगल आगजनी के कारण नष्ट हो रहें है।

आपको बता दे कि सरगुजा कलेक्टर संजीव झा खुद मान रहें है कि उनके जिले सरगुजा में आगजनी की घटनाएं बड़ी तेजी से बढ़ी है और धीरे-धीरे अलग की लपटें पूरें जंगल में फैल रहीं है. ज्ञातव्य हो कि सरगुजा जिले लगभग-लगभग सभी वनपरिक्षेत्र इलाकें में आगजनी के मामलें देखने को मिल रहें है।

क्योंकि यहाँ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट मामलें में गंभीर नजर नहीं आ रहा है यहीं कारण है कि यहाँ के जंगलों भीषण आग की लपटें बड़ी तेजी से फैल रहीं है।

(Ambikapur) वहीं मीडिया ने जब इस मामलें को लेकर सरगुजा कलेक्टर संजीव झा से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि इस सीजन में आगजनी की घटनाएं जो सामने आती है वो बहुत दुःखद है. क्योंकि यह नैचुरल ग्रीन फॉरेस्ट्री एरिया में आता है।

जिसमें दुर्लभ साल के बड़े घने नैचुरल फॉरेस्टेशन है. वहीं सरगुजा कलेक्टर ने जंगलों में आगजनी होने का मुख्य कारण ये भी बताया कि आगजनी के ज्यादातर मामलों में ग्रामीणों द्वारा महुआ बीनने के समय लापरवाही वश आग जलाने के कारण व कुछ मामलों में असामाजिक तत्वों द्वारा भी जंगलों में आग लगाना भी यहाँ के आगजनी होने का मुख्य कारण है।

कलेक्टर ने कहा कि मेरे द्वारा फॉरेस्ट विभाग की टीम को निर्देशित किया गया है कि फायर वॉचर और वन प्रबंधन समिति से बात करके जंगलों में आगजनी रोकने के लिए निगरानी और बढ़ाया जाए ताकि आग की हल्की लपटे फैलकर भीषण आग के लपटों का रूप न लें।

 क्योंकि साल के अंडर ग्रोथ ही आने वालें समय में भविष्य के विशाल साल के वृक्ष बनेंगे अगर आगजनी होती है तो जंगलों में अंडर ग्रोथ रुक जाता है जो भविष्य में वनों के विस्तारीकरण में बहुत बड़ी बाधा है।

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