अजमेर का अली अकबर: ऑटो चालक से आतंकी साजिश तक का खौफनाक सफर

दिल्ली। अंबाला में विस्फोटक सामग्री के साथ पकड़े गए अजमेर के निवासी अली अकबर उर्फ बाबू की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों और उसके परिवार, दोनों को हतप्रभ कर दिया है। अकबर पर पाकिस्तान से भेजे गए 2 किलो आरडीएक्स और आईईडी के जरिए हनुमानगढ़ (राजस्थान) में ब्लास्ट की साजिश रचने का आरोप है।
लॉरेंस गैंग का नाम लेकर दी थी धमकी
जांच में सामने आया है कि अकबर का आपराधिक झुकाव नया नहीं है। चार साल पहले, अजमेर के एक गेस्ट हाउस मालिक इकबाल अहमद ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। अकबर ने किराया विवाद को लेकर इकबाल को फोन पर धमकाते हुए कहा था, “तू जानता नहीं मुझे, मैं लॉरेंस गैंग से जुड़ा हूं। इतने में ही समझ जा, वरना ठीक नहीं होगा।” उस वक्त पुलिस ने उसे शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर पाबंद किया था।
पाकिस्तानी आकाओं से कनेक्शन
खुफिया सूत्रों के अनुसार, अकबर और उसके दो साथी पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी के इशारे पर काम कर रहे थे। साजिश के तहत अमृतसर में ड्रोन के जरिए विस्फोटक गिराया गया था।
उनकी पहली योजना हनुमानगढ़ में धमाका करने की थी, लेकिन आरडीएक्स समय पर न पहुंचने के कारण यह फेल हो गई। पकड़े जाने से पहले आरोपी हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के कई इलाकों की रेकी कर वीडियो सीमा पार भेज चुके थे।
परिवार का पक्ष: “फंसाने वालों को पकड़ो”
अजमेर के लोंगिया मोहल्ले में रहने वाले अकबर के पिता रोडवेज से रिटायर्ड कंडक्टर हैं। अकबर खुद ऑटो चलाकर परिवार पालता था।
उसके भाई अली असगर का कहना है कि अकबर 8 मार्च को दिल्ली घूमने की बात कहकर घर से निकला था। भाई ने भावुक अपील करते हुए कहा, “हमारा भाई तो गया, लेकिन सरकार उन लोगों को पकड़े जिन्होंने उसे लालच देकर फंसाया, ताकि देश के दूसरे युवा इस दलदल में न फंसें।”
फिलहाल, अदालत ने अकबर को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है, जहां सुरक्षा एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।



