रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को लेकर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्त पहल रंग ला रही है।
मुख्यमंत्री की मंशा और कलेक्टर के मार्गदर्शन में सारंगढ़ विकासखंड में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से 30 कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
इतना ही नहीं, बच्चों के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उनकी नियमित देखभाल और उपचार की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर आईएमए की जिला इकाई ने सेवा का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए ग्राम छुहीपाली के 15 कुपोषित बच्चों को गोद लेने का निर्णय लिया।
आईएमए के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम इन बच्चों के उपचार, आवश्यक दवाइयों और विशेष पोषण आहार का पूरा खर्च वहन करेगी। इस पहल को सामाजिक सहभागिता और जनसेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेष स्वास्थ्य शिविर में जिला चिकित्सालय की शिशु रोग विशेषज्ञ ने सभी 30 बच्चों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की।
परीक्षण के दौरान जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण (एसएएम) के लक्षण पाए गए, उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने की सलाह दी गई, ताकि उन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में बेहतर उपचार मिल सके।
इस अभियान को केवल एक दिवसीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है। बच्चों की नियमित निगरानी के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रत्येक सप्ताह बच्चों के वजन और शारीरिक विकास की निगरानी करेंगी। वहीं एक माह बाद स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और आईएमए की संयुक्त टीम दोबारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी, ताकि उनके स्वास्थ्य में आए सुधार का आकलन किया जा सके।
इस अभियान को सफल बनाने में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, ईएनटी विशेषज्ञ, जन औषधि केंद्र, आशा निकेतन और एकीकृत बाल विकास परियोजना के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रशासन का मानना है कि सरकार, चिकित्सकों और समाज की साझी भागीदारी से कुपोषण के खिलाफ यह अभियान और अधिक प्रभावी बनेगा तथा बच्चों को स्वस्थ भविष्य देने में मदद मिलेगी।
