छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 के लिए केंद्र-राज्य में ऐतिहासिक समझौता; अब पंचायतों को मिलेंगे बड़े अधिकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आज एक बड़ा कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच ऐतिहासिक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
82% से अधिक घरों तक पहुंचा नल, अब ‘मेंटेनेंस’ पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों (लगभग 82.66%) को नल कनेक्शन दिया जा चुका है। मिशन 2.0 का मुख्य उद्देश्य केवल पाइप बिछाना नहीं, बल्कि जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करना और इसमें जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।
एमओयू की 3 बड़ी बातें:
पंचायतें होंगी पावरफुल: केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि अब ग्राम पंचायतों को जल संरचनाओं के रखरखाव के लिए जिम्मेदार और सशक्त बनाया जाएगा। जिला प्रशासन उनकी निगरानी और सहायता करेगा।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1300 करोड़ की मांग: सीएम साय ने बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के 3,000 गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए केंद्र से विशेष पैकेज का आग्रह किया है।
सतत जल प्रबंधन: मिशन के इस दूसरे चरण में जल स्रोतों के पुनर्भरण (Recharge) और तकनीक आधारित वितरण प्रणाली पर फोकस रहेगा।
महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में शुद्ध पानी पहुंचने से सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को हुआ है, जिन्हें पहले मीलों पैदल चलना पड़ता था। मिशन 2.0 ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को स्थायी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।





