रक्षाबंधन पर हरियाली का संदेश: रायगढ़ में महिलाओं ने तैयार कीं बीज राखियां, मिट्टी में डालते ही उगेंगे पौधे

रायपुर। इस रक्षाबंधन रायगढ़ जिले में भाई-बहन के प्रेम के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा। जिला प्रशासन, जिला पंचायत और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की पहल पर स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अनोखी बीज राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों की खासियत यह है कि उपयोग के बाद इन्हें मिट्टी में डालने पर इनमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेंगे।

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिले के सातों विकासखंडों में यह अभियान चलाया जा रहा है। बीज राखियां धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे देसी बीजों से बनाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए लोगों को हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है।

जिले के गांवों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार की कृष्णा स्व-सहायता समूह की सदस्य कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार की हैं। वहीं बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार, घरघोड़ा और पुसौर सहित विभिन्न क्षेत्रों की कृषि सखियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी इस नवाचार में भाग ले रही हैं।

बिहान मिशन के तहत 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन में डिजाइन, देसी बीजों के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।

प्रतियोगिता की विजेता महिलाओं को 27 जुलाई को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर वे कलेक्टर सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई गई बीज राखियां बांधेंगी। जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल रक्षाबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के जनजागरूकता अभियान का प्रभावी माध्यम बनेगी।

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