जमानत को निरस्त करने की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट से खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें रेप के झूठे मामले में फंसाने के आरोप में जमानत को निरस्त करने की मांग की गई थी। पुलिस ने एक महिला समेत दो आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
प्रकरण के मुताबिक, रायपुर निवासी पारसमणि चंद्राकर पर एक महिला ने रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई। जेल में रहते हुए पारसमणि ने दावा किया कि महिला ने उसे झूठे आरोपों में फंसाया था, जिसके आधार पर महिला के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में यह तर्क दिया कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं और गवाह पेश नहीं हो रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। लेकिन महिला और सह-आरोपी ने कहा कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन साबित नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जमानत को रद्द करने के लिए प्रस्तुत किए गए तर्क पर्याप्त नहीं थे और कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए याचिका को अस्वीकार कर दिया गया।