भारत माला मुआवजा घोटाला: रायपुर–महासमुंद में ED की रेड, 40 लाख नकद और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त

रायपुर। रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापत्तनम हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए कथित मुआवजा घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई की है।
रायपुर जोनल कार्यालय ने 29 दिसंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रायपुर और महासमुंद जिले के 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
इस दौरान ED ने लगभग 40 लाख रुपए नगद, कई डिजिटल डिवाइस और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। साथ ही अनुसूचित अपराध से अर्जित आय यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ से जुड़ी कई चल-अचल संपत्तियों की भी पहचान की गई है।
ED की यह जांच ACB/EOW रायपुर द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। FIR में निर्भय साहू, तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) अभनपुर सहित अन्य आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छापेमारी के दौरान हरमीत सिंह खानूजा और अन्य संदिग्धों के आवासीय और आधिकारिक परिसरों की तलाशी ली गई।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर रायपुर–विशाखापत्तनम हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया।
परिवार के सदस्यों के बीच जमीन के बड़े-बड़े टुकड़ों को जानबूझकर छोटे हिस्सों में बांटकर पिछली तारीख की एंट्री दिखाई गई, ताकि यह लगे कि जमीन पहले से कई हिस्सों में विभाजित है। इस कृत्रिम बंटवारे का मकसद मुआवजा नीति का दुरुपयोग कर अधिक राशि हासिल करना था।
इस फर्जीवाड़े के आधार पर बढ़ी हुई मुआवजा राशि स्वीकृत और वितरित कर दी गई, जिसे ED ने अपराध की आय यानी POC माना है। तलाशी के दौरान मिले नकद, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि घोटाले का नेटवर्क बड़ा है। ED ने साफ किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे तथा कानूनी कार्रवाई संभव है।





