इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान का पहला बयान: बोले- जेन-जी हमारे ही बच्चे, युवाओं की आकांक्षाओं के सामने मंत्री पद छोटी जिम्मेदारी

दिल्ली। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जेन-जी यानी नई पीढ़ी देश का भविष्य है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रधान ने कहा, “जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने के बाद ही पद छोड़ा।”
प्रधान ने कहा कि युवाओं के संकल्प और आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। इसलिए उनके लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और मंजूरी मांगी थी। प्रधानमंत्री के सहमत होने और युवाओं से बातचीत करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया।
कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। इस पर प्रधान ने कहा कि वे इससे परेशान नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं किसान का बेटा हूं। आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे, तब भी मैं वापस आऊंगा।” उन्होंने कहा कि उन्होंने ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों का सिर कभी शर्म से नहीं झुकने दिया और आगे भी प्रदेश के गौरव और स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे।
प्रधान ने कहा कि जेन-जी की जिद से उन्हें परेशानी नहीं हुई। नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उसे समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और पिछले 10 वर्षों में लगभग 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। इन युवाओं के सपने हैं और वे भारत को विश्व गुरु बनाने की क्षमता रखते हैं।
प्रधान का पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन से पुराना जुड़ाव भी रहा है। 1997 में ओडिशा में पेपर लीक के विरोध में करीब 1,500 छात्रों के प्रदर्शन में वे शामिल हुए थे। पुलिस लाठीचार्ज में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और फ्रैक्चर भी हुआ था। NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्होंने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।





