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बस्तर पंडुम में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, छत्तीसगढ़ हमेशा घर जैसा लगता; यहां की संस्कृति प्राचीन और सबसे मीठी

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम महोत्सव में कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें हमेशा अपने घर आने जैसा लगता है।

उन्होंने कहा कि यहां की संस्कृति प्राचीन, समृद्ध और सबसे मीठी है। बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ऐसा उत्सव है जिसे लोग पूरे मन से जीते हैं। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, लोकसंस्कृति और परंपराएं देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासी समाज को भारी नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि जो लोग अब भी हिंसा के लिए उकसाते हैं, उनकी बातों में न आएं। विकास, शिक्षा और शांति का रास्ता ही क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।

राष्ट्रपति ने बस्तर की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय जीवनशैली की सराहना करते हुए कहा कि यहां की सुंदरता देखकर लगता है मानो मां दंतेश्वरी ने इसे अपने हाथों से संवारा हो।

उन्होंने गांव-गांव तक पहुंच रही सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उनका आगमन पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने बस्तर पंडुम को आदिवासी संस्कृति, कला और परंपराओं का जीवंत मंच बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न जनजातियों द्वारा पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, वेशभूषा और रीति-रिवाजों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।

राष्ट्रपति को ढोकरा कला से बना कर्मा वृक्ष और कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया गया। पूरे आयोजन में उत्साह, आत्मगौरव और सांस्कृतिक समृद्धि की झलक साफ नजर आई।

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