नशे का गढ़ बन रहा पूर्वोत्तर का मिजोरम: म्यांमार से आ रही सिंथेटिक ड्रग्स, 3 साल में 4000 किलो से ज्यादा जब्त

आइजोल। पूर्वोत्तर का राज्य मिजोरम इन दिनों नशे के गंभीर संकट से जूझ रहा है। म्यांमार से लगी करीब 500 किलोमीटर लंबी खुली सीमा के रास्ते आने वाली सिंथेटिक ड्रग्स ने राज्य में चिंता बढ़ा दी है। खासकर ‘आइस’ नाम की खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है। पिछले तीन वर्षों में राज्य में करीब 4000 किलो ड्रग्स जब्त की जा चुकी है।
म्यांमार सीमा से सटा चंफाई जिला नशे की तस्करी का प्रमुख रास्ता बन गया है। तस्कर जंगलों और पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल कर ड्रग्स की खेप भारत तक पहुंचा रहे हैं। इसके बाद इसे राज्य के अन्य हिस्सों में सप्लाई किया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह नेटवर्क इतना सक्रिय है कि ड्रग्स की होम डिलीवरी तक होने लगी है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि नशे का कारोबार अब डिजिटल माध्यमों से संचालित हो रहा है। तस्कर वॉट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गुप्त ग्रुप बनाकर ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। ‘आइस’ और ‘कैंडी’ जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल कर ड्रग्स की बिक्री की जा रही है।
मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ड्रग्स के कारण बड़ी संख्या में युवा प्रभावित हो रहे हैं। आइजोल में कुछ ही महीनों में नशे के सैकड़ों मरीज सामने आए हैं। इनमें से कई पहले शराब या गांजा का सेवन करते थे, लेकिन बाद में सिंथेटिक ड्रग्स की गिरफ्त में आ गए।
हालांकि इस संकट से निपटने के लिए मिजो समाज ने भी बड़ी पहल की है। ‘यंग मिजो एसोसिएशन’ (वाईएमए) के करीब 5 लाख वॉलेंटियर्स नशे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। संगठन ने ‘ऑपरेशन जेरिको’ शुरू किया है, जिसके तहत संवेदनशील इलाकों में निगरानी रखी जा रही है और पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जा रही है।
वाईएमए के अनुसार, कार्रवाई बढ़ने के बाद तस्करों ने रास्ते बदलने शुरू कर दिए हैं। अब म्यांमार से मणिपुर के रास्ते ड्रग्स लाकर मिजोरम और अन्य राज्यों में पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार और स्थानीय संगठनों के लिए यह चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है।



