छत्तीसगढ़राजनांदगांव

अधर में बच्चों का भविष्य, एक शिक्षिका के भरोसे स्कूल के 42 बच्चे,जिम्मेदार अफसर नहीं दे रहे ध्यान

राजनांदगांव। डोंगरगढ विकासखंड के वनांचल और नक्सल प्रभावित गांव बांस पहाड़ में मासूमों की शिक्षा पर ग्रहण लग चुका हैं। गांव की दूरी ब्लाक मुख्यालय से महज 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
गाव में एक स्कूल है जिसमें 42 बच्चे पढ़ते हैं। जो कि सिर्फ एक शिक्षिक के भरोसे चल रहा है। छत का लेंटर में जगह-जगह दरारें पड़ी हुई है. छत का प्लास्टर टूट-टूट कर गिर रहा है. विडंबना देखिए ठेकेदार की लापरवाही के कारण छत का लेंटर अब तक कंप्लीट नहीं हो पाया है। बच्चे सामुदायिक भवन में पढ़ने को मजबूर है।

राजनादगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड व डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बांस पहाड़ जो कि आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यह गांव पूरी तरह से जंगलों से घिरा है।
गांव में एक ही स्कूल प्राथमिक शाला है और स्कूल का कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण बच्चे सामुदायिक भवन में पड़ने को मजबूर है। स्कूल के जनभागीदारी अध्यक्ष भुनेश्वर नागवंशी ने बताया कि उनके द्वारा शिक्षक की कमी व स्कूल भवन को लेकर स्थानीय विधायक दलेश्वर साहू व शिक्षा विभाग को कई बार अवगत कराया गया था, लेकिन उनके द्धारा कोई सुध नहीं लिया गया। शिक्षिका विद्या साहू ने बताया कि पढ़ाई को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद रहती है। साथ ही अन्य गतिविधियों से भी बच्चों को अवगत कराती है। स्कूल भवन का लेंटर जल्द पूरा हो जाता तो बच्चों की पढ़ाई अच्छे से होती। क्योकि वर्तमान में जिस स्थान पर स्कूल लग रहा है उसके बाजू में बड़ा तलाब व गौठान है। जिसके कारण हर समय डर बना रहता है।

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