बंद स्कूल फिर खुले, जेईई-नीट की मुफ्त कोचिंग से विद्यार्थियों को मिली सफलता; 538 विद्यालय संचालित
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले दो वर्षों में कई पहल की हैं। दूरस्थ गांवों में नए स्कूल खोलने, बंद शालाओं को दोबारा शुरू करने और वैकल्पिक शालाओं के संचालन से बच्चों को पढ़ाई के अवसर मिल रहे हैं। जिले में 24 वैकल्पिक शालाओं के माध्यम से करीब 800 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
बंद स्कूलों में फिर शुरू हुई पढ़ाई
नियद नेल्ला नार योजना के तहत शिक्षा सत्र 2024-25 में ईरक्कभट्टी, जड्डा, ताडोबेडा और तोयामेटा (एनमेटा) में चार नए प्राथमिक विद्यालय शुरू किए गए। इसके अलावा लंबे समय से बंद नौ प्राथमिक शालाओं में फिर पढ़ाई शुरू कराई गई। इससे 207 विद्यार्थियों को लाभ मिला। सत्र 2026-27 में चार प्राथमिक शालाओं का शुभारंभ भी किया गया है।
‘स्कूल केईंता’ अभियान के तहत 24,701 परिवारों का सर्वे किया गया। इसमें 1,047 शाला त्यागी और 1,295 अप्रवेशी बच्चों की पहचान कर उन्हें स्कूलों से जोड़ने की पहल की गई। जिले में वर्तमान में 538 विद्यालय संचालित हैं। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए 187 सरकारी स्कूलों में 273 अतिथि शिक्षकों की स्वीकृति दी गई है।
मुफ्त कोचिंग से इंजीनियरिंग-मेडिकल में चयन
जिले में जेईई और नीट की तैयारी के लिए दो वर्षों से निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। सत्र 2025-26 में गणित संकाय के 29 विद्यार्थियों में से 16 का चयन प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में हुआ। वहीं, जीवविज्ञान संकाय के सात विद्यार्थियों ने नीट काउंसलिंग प्रक्रिया में सफलता हासिल की। इनमें एक विद्यार्थी का चयन सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हुआ।
डिजिटल और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर
जिले में 10 आईसीटी लैब, 32 स्मार्ट क्लास और आठ विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब संचालित हैं। 12 हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा सात स्वामी आत्मानंद विद्यालय और दोनों विकासखंडों में एक-एक पीएम श्री विद्यालय संचालित हैं। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों के लिए पीएम जनमन योजना के तहत 100-100 सीटों वाले बालक और बालिका छात्रावास शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
