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सुकमा में 22 नक्सलियों ने किया सरेंडर: मुख्यधारा से जुड़े, बोले– सरकार के साथ मिलकर करेंगे काम, पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ

सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में मंगलवार (17 फरवरी) को 22 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। नक्सल उन्मूलन नीति और “पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान” से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। सभी ने सरकार के साथ जुड़कर समाज के विकास में योगदान देने की इच्छा जताई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, मजबूत सड़क नेटवर्क और विकास कार्यों की बढ़ती पहुंच के चलते माओवादी संगठन कमजोर पड़ा है। इन प्रयासों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण हो रहा है। मंगलवार को हुए इस सामूहिक सरेंडर को सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि नक्सली संगठन अब अंतिम दौर में है। 22 नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है। सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, आवास, रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

सरेंडर करने वालों में जीआरडी मिलिशिया कमांडर गोंचे हुंगा, आरपीसी जंगल कमेटी अध्यक्ष मिडियाम आयता, जनताना सरकार उपाध्यक्ष मुचाकी सुक्का, आरपीसी कृषि कमेटी अध्यक्ष कुंजाम केसा, केएएमएस सदस्या लक्ष्मी मुचाकी सहित कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा पंचायत मिलिशिया, आरपीसी मिलिशिया और डीएकेएमएस से जुड़े सदस्य भी आत्मसमर्पण करने वालों में हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों की काउंसलिंग कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पुनर्वास योजनाओं के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि वे दोबारा हिंसा के रास्ते पर न लौटें।

इस सामूहिक सरेंडर से क्षेत्र में शांति बहाली और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता बताया है।

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