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UPA सरकार के 2 और कानूनों में बदलाव होगा: मनरेगा के बाद शिक्षा और खाद्य सुरक्षा अधिकार कानून में सुधार की तैयारी

दिल्ली। केंद्र सरकार मनरेगा के बाद अब यूपीए सरकार के कार्यकाल में बने दो बड़े कानूनों शिक्षा का अधिकार (RTE) और खाद्य सुरक्षा अधिकार कानून में सुधार की तैयारी कर रही है। सरकार का मकसद इन योजनाओं का लाभ सही और पात्र लोगों तक पहुंचाना और सभी लाभार्थियों का 100 प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करना है। इसके लिए पहले नियमों और सरकारी आदेशों के जरिए बदलाव किए जाएंगे। यदि इससे अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो संसद में नए संशोधन विधेयक लाने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

परामर्श प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, मनमोहन सिंह सरकार के दौर में विकास से जुड़े जिन अधिकारों को कानूनी रूप दिया गया था, उनमें जमीनी स्तर पर कई खामियां रह गईं। न तो हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकी और न ही हर जरूरतमंद परिवार तक खाद्य सुरक्षा का लाभ पहुंच पाया। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए मौजूदा सरकार योजनाओं की दोबारा समीक्षा कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी योजनाओं में लाभार्थियों का पूर्ण पंजीकरण हो और लाभ समय पर, पारदर्शी तरीके से सही व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास—इन पांच प्रमुख क्षेत्रों में सुधार को लेकर तीन स्पष्ट लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। पहला, योजनाओं की पूरी कवरेज के लिए समय-सीमा के साथ लक्ष्य तय करना। दूसरा, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग। तीसरा, हर लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रव्यापी पंजीकरण अभियान चलाना।

गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र में मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB–G Ram G बिल पास किया गया था, जिसे दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। विपक्षी दलों ने इस कानून में महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विरोध भी दर्ज कराया था। अब शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानूनों में संभावित सुधार को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।

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