लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल,पीएम मोदी करेंगे विशेष चर्चा

रायपुर। संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजे इस बहस की शुरुआत करेंगे।
इसके लिए लगभग 10 घंटे का समय तय किया गया है। सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री हिस्सा लेंगे, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और उपनेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई सहित आठ सांसद बोलेंगे। अन्य दलों के सांसद भी अपनी बात रखेंगे।
वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और यह पहली बार उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में प्रकाशित हुआ। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में मंच पर गाया, जिससे यह सार्वजनिक रूप से लोकप्रिय हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत छात्रों और आंदोलनकारियों के लिए प्रेरणा बन गया। संविधान सभा ने इसे 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत घोषित किया।
सरकार संसद में इस चर्चा के जरिए राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व को उजागर करना चाहती है। इसके पीछे मुख्य पांच वजहें मानी जा रही हैं:
- राष्ट्रीय भावना और एकता को मजबूत करना।
- बंगाल चुनाव के राजनीतिक संकेत देना।
- 1937 में वंदे मातरम् के हिस्से को हटाने की ऐतिहासिक बहस को सामने लाना।
- बंगाल विभाजन और स्वतंत्रता आंदोलन की याद ताजा करना।
- विपक्षी बहस से ध्यान हटाकर संसद का सकारात्मक माहौल बनाना।
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही इस अवसर पर डाक टिकट और सिक्का जारी कर स्मरण समारोह का उद्घाटन किया था। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदानों का प्रतीक है और देशभक्ति की भावना को आज भी प्रेरित करता है। इस चर्चा से यह उम्मीद है कि राष्ट्रगीत के महत्व को देशभर में नए उत्साह के साथ समझाया जाएगा और संसद में भावनात्मक तथा ऐतिहासिक बहस का मंच तैयार होगा।





