दिल्ली। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर बुधवार को देशभर में 15 लाख से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहे। दवा दुकानदारों ने ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और बड़ी ई-फार्मा कंपनियों के बढ़ते दबदबे के खिलाफ यह राष्ट्रव्यापी बंद बुलाया है। हालांकि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर और इमरजेंसी दवाओं की सप्लाई जारी रखने का दावा किया गया है।
AIOCD के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने ऑनलाइन दवा कंपनियों को जो छूट दी थी, अब उसका गलत इस्तेमाल हो रहा है। संगठन का आरोप है कि बिना पर्याप्त नियमों के ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटी मेडिकल दुकानों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और लोगों की सेहत भी खतरे में पड़ सकती है।
दवा व्यापारियों की प्रमुख मांगों में ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण, ई-फार्मेसी के लिए नए नियम और सरकार के GSR 220(E) व GSR 817(E) नियमों को वापस लेना शामिल है। दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां 20% से 50% तक डिस्काउंट देकर छोटे व्यापारियों के लिए मुश्किल खड़ी कर रही हैं। साथ ही नकली या गलत प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाइयों की बिक्री का खतरा भी बढ़ रहा है।
दिल्ली, चेन्नई, चंडीगढ़, लुधियाना और राजस्थान समेत कई शहरों में मेडिकल मार्केट बंद रहे और बाजारों में सन्नाटा नजर आया। हालांकि सरकार का दावा है कि देश के कई राज्यों, जैसे महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के दवा व्यापारी संगठनों ने बंद से दूरी बनाई है, जिससे दवाओं की किल्लत नहीं होगी।
सरकार और ड्रग रेगुलेटर ने इस मामले में बातचीत शुरू कर दी है। हाल ही में AIOCD प्रतिनिधियों ने केंद्रीय ड्रग रेगुलेटर से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं, जिस पर नियमों की समीक्षा का भरोसा दिया गया है।
