दिल्ली। स्वास्थ्य जगत से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026’ के आंकड़ों ने भारत में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब बच्चों में मोटापे के मामले में चीन के बाद वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि 2025 से 2027 के बीच दुनिया में कम वजन वाले बच्चों की तुलना में मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या अधिक हो जाएगी।
भारत के डराने वाले आँकड़े
भारत में 5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 4.1 करोड़ बच्चे उच्च बीएमआई (Body Mass Index) के साथ जी रहे हैं, जिनमें से 1.4 करोड़ बच्चे पूरी तरह मोटापे की चपेट में हैं। 5-19 वर्ष के बच्चों में मोटापा 4.8% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी यह वृद्धि दर 4.4% दर्ज की गई है।
गंभीर बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों का “गोल-मटोल” होना हमेशा स्वस्थ होने की निशानी नहीं है। यह मोटापा बच्चों के शरीर में लिवर डैमेज, टाइप-2 डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की नींव रख रहा है।
क्यों फूल रही है बच्चों की सांस
मोटापा बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से शारीरिक सक्रियता में कमी और खान-पान में बदलाव जिम्मेदार हैं:
- गतिविधि का अभाव: 11-17 वर्ष के 74% किशोर कोई शारीरिक मेहनत नहीं करते।
- शहरीकरण: गांवों की तुलना में शहरों में मोटापा 10% अधिक है।
- फिटनेस सर्वे: 112 शहरों के स्कूलों में किए गए सर्वे के अनुसार, 3 में से केवल 1 बच्चा ही बिना हांफे दौड़ने में सक्षम है। अधिकांश बच्चों में कार्डियोरेस्पिरेटरी और एरोबिक फिटनेस बेहद कमजोर पाई गई है।
रोकथाम के उपाय
स्पोर्ट्ज विलेज के एमडी सौमिल मजूमदार के अनुसार, स्कूलों में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य और संरचित (Structured) बनाना अब समय की मांग है। साथ ही, माताओं में बढ़ता मोटापा और शिशुओं को पर्याप्त स्तनपान न मिलना भी इस समस्या को बढ़ा रहा है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।
