रायपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के तहत गुरुवार को रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (SHSRC) के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में स्तनपान के महत्व, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी घोषणा प्रदेश के पहले ‘मातृ दूध कोष (मदर मिल्क बैंक)’ की स्थापना रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मां का दूध नवजात के लिए सबसे सुरक्षित, संपूर्ण और प्राकृतिक आहार है।
उन्होंने कहा कि मदर मिल्क बैंक की स्थापना ऐसे शिशुओं के लिए जीवनदायी साबित होगी, जिन्हें किसी कारणवश अपनी मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता।
उन्होंने प्रदेश की 72 हजार मितानिनों की सराहना करते हुए उन्हें आज की “शबरी” बताया, जो निस्वार्थ भाव से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सेवा कर रही हैं।
इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों की 10 माताओं को ‘माता यशोदा सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
इन माताओं ने अपने मातृ दुग्ध का दान कर उन नवजातों को जीवनदान दिया, जिनकी माताएं स्तनपान कराने में सक्षम नहीं थीं या उनका निधन हो चुका था।
इस सम्मान के जरिए मातृ दुग्ध दान को सामाजिक आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने और शुरुआती छह माह तक केवल मां का दूध देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और प्रत्येक मां को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की अपील की।
कार्यक्रम में आयुक्त एवं मिशन संचालक संजीव झा, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, चिकित्सा विशेषज्ञ, नर्सिंग अधिकारी, मितानिनें और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आयोजन के माध्यम से स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त करने का संकल्प दोहराया गया।
