अंबिकापुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों का असर अब गांवों में दिखाई दे रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं और छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिलने वाली ऋण सहायता के जरिए स्व-सहायता समूहों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की आकांक्षा स्व-सहायता समूह ने भी एक लाख रुपए के ऋण से अपनी आजीविका का नया जरिया तैयार किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मिली योजना की जानकारी
समूह की अध्यक्ष हरमनिया देवी राजवाड़े ने बताया कि समूह की महिलाओं के सामने नियमित आमदनी का साधन विकसित करने की चुनौती थी। बैठकों में चर्चा के बाद ऐसा व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिससे महिलाओं को लगातार आय मिल सके।
इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिलने वाले ऋण की जानकारी दी। हरमनिया ने समूह की सदस्यों से चर्चा कर जरूरी दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया पूरी की। आवेदन स्वीकृत होने के बाद समूह को एक लाख रुपए का ऋण मिला।
किराना और सिंगार दुकान शुरू की
समूह की महिलाओं ने आपसी सहमति से ऋण की राशि से किराना और सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की। गांव में रोजमर्रा की जरूरतों और सिंगार सामग्री की मांग को देखते हुए यह कारोबार धीरे-धीरे चल निकला। दुकान पर ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ समूह की महिलाओं को नियमित आय का अवसर मिलने लगा।
हरमनिया ने बताया कि पहले समूह की महिलाओं के पास कोई स्थायी आजीविका गतिविधि नहीं थी। अब महिलाएं दुकान के संचालन में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ग्राहकों की जरूरत के अनुसार दुकान में नई सामग्री भी जोड़ी जा रही है, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च में मिली राहत
व्यवसाय से होने वाली अतिरिक्त आमदनी का असर महिलाओं के परिवारों पर भी पड़ा है। आय बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक सामग्री और घरेलू जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान देने की क्षमता भी मजबूत हुई है।
हरमनिया ने कहा कि समूह के माध्यम से सामूहिक निर्णय लेकर व्यवसाय चलाने से महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ी है।
बोलीं- ऋण ने अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया
हरमनिया देवी राजवाड़े ने कहा, “एक लाख रुपए की ऋण सहायता से शुरू की गई किराना और सिंगार दुकान हमारे समूह की आजीविका का आधार बन रही है। इससे महिलाओं को नियमित आमदनी मिली और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिली।”
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ शासन और महिला एवं बाल विकास विभाग का आभार जताते हुए कहा कि महिला समूहों को ऋण और रोजगार से जोड़ने वाली योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
