दिल्ली। एविएशन पर निगरानी रखने वाली संस्था DGCA ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों (चार्टेड प्लेन और एयर एंबुलेंस) के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब इन ऑपरेटरों को अपनी वेबसाइट पर प्रत्येक विमान की मेंटेनेंस हिस्ट्री और उसकी उम्र सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। नियमों के अनुसार किसी हादसे या गलती की स्थिति में सिर्फ पायलट ही नहीं बल्कि ऑपरेटर भी जिम्मेदार होगा।
यह कदम झारखंड में चार्टेड प्लेन क्रैश के बाद उठाया गया। DGCA ने सभी ऑपरेटरों के साथ मीटिंग कर उनके सेफ्टी रिकॉर्ड के आधार पर रैंकिंग करने का प्रस्ताव भी रखा है। यह रैंकिंग DGCA की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी। पिछले एक महीने में नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों द्वारा संचालित दो चार्टेड प्लेन हादसों के कारण यह फैसला आया है।
नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर वे कंपनियां हैं, जो नियमित कमर्शियल फ्लाइट्स नहीं चलातीं, बल्कि जरूरत या बुकिंग के आधार पर उड़ान भरती हैं।
देश में हाल के चार्टेड प्लेन हादसे
23 फरवरी 2026 – झारखंड एयर एंबुलेंस क्रैश: रांची से दिल्ली जा रही रेडबर्ड कंपनी की बीचक्राफ्ट किंग एयर B90L एयर एंबुलेंस चतरा जिले में क्रैश हो गई। विमान में कैप्टन विवेक विकास भगत, कैप्टन सबराजदीप सिंह, मरीज संजय कुमार, परिजन अर्चना देवी और धूरू कुमार, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता और पैरामेडिकल स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा सवार थे। सभी सात लोगों की मौत हो गई।
28 जनवरी 2026 – महाराष्ट्र डिप्टी CM अजित पवार का प्लेन क्रैश: बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टेड प्लेन क्रैश हो गया। डिप्टी CM समेत पांच लोगों की जान गई। पायलट ने पहली लैंडिंग प्रयास असफल होने के बाद दूसरी कोशिश की, लेकिन विमान रनवे से पहले ही गिर गया और उसमें आग लग गई।
DGCA का नया नियम चार्टेड ऑपरेटरों की सुरक्षा मानकों को मजबूती देने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
