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एशियन गेम्स का मेडल जीतना मेरा अधूरा सपना, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ‘गेम-चेंजर’: मीराबाई चानू

रायपुर। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता वेटलिफ्टर सेखोम मीराबाई चानू ने गुरुवार को राजधानी रायपुर में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के भव्य उद्घाटन अवसर पर अपने दिल की बात साझा की।

उन्होंने कहा कि उनके शानदार करियर में ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप के पदक तो हैं, लेकिन एशियन गेम्स का पदक जीतना आज भी उनका एक अधूरा सपना है, जिसे वे हर हाल में पूरा करना चाहती हैं।

चोट और किस्मत ने अब तक रोका

31 वर्षीय दिग्गज खिलाड़ी ने बताया कि एशियाई खेलों की राह उनके लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। 2014 इंचियोन में19 साल की उम्र में वे 9वें स्थान पर रहीं। 2018 जकार्ता में पीठ की चोट के कारण बाहर होना पड़ा। 2022 हांगझोउ में हिप इंजरी ने पदक का सपना तोड़ दिया।

मीराबाई ने कहा, “एशियन गेम्स में प्रतिस्पर्धा का स्तर बहुत ऊंचा होता है। वहां पदक जीतना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन इस बार वेट कैटेगरी (भार वर्ग) का संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी।”

हाल ही में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने 48 किग्रा वर्ग में 205 किग्रा (89 किग्रा स्नैच + 116 किग्रा क्लीन एंड जर्क) उठाकर तीन नए नेशनल रिकॉर्ड बनाए हैं, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

ट्राइबल गेम्स की सराहना

छत्तीसगढ़ की मेजबानी में हो रहे इन खेलों को मीराबाई ने ‘गेम-चेंजर’ बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व के युवाओं में अद्भुत प्रतिभा है, बस उन्हें सही मंच की तलाश रहती है।

खेलो इंडिया जैसे अभियान और ‘नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (NCOE) के माध्यम से अब खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और पोषण मिल रहा है, जो भारतीय खेलों के भविष्य के लिए सुखद संकेत है।

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