बिटकुली में शासकीय भूमि पर दबंगई, ग्रामीणों का ऐलान; अब आर-पार की लड़ाई

बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले की सुहेला तहसील अंतर्गत ग्राम बिटकुली में शासकीय और चारागाह भूमि पर कथित कब्जे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लीज समाप्त हो चुकी खदान क्षेत्र के पास धर्मशाला और मंदिर निर्माण के नाम पर बिना ग्रामसभा की अनुमति समतलीकरण कर कार्य शुरू किए जाने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है और वर्षों से इसे चारागाह व सार्वजनिक उपयोग में लाया जाता रहा है। आरोप है कि नहर और टार मार्ग से लगे क्षेत्र में पहले खदान के अपशिष्ट पत्थरों की डंपिंग की गई, फिर हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर जमीन को समतल किया गया। ग्रामीण इसे सीधा अतिक्रमण बता रहे हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले इसी स्थान पर अवैध कचरा डंपिंग का मामला उठा था, जिसे ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने हटवाया था। इसके बावजूद दोबारा निर्माण गतिविधि शुरू होने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

28 फरवरी 2026 को सरपंच की उपस्थिति में ग्रामसभा आयोजित हुई, जिसमें ग्रामीणों ने एकमत से कार्रवाई का विरोध किया। संबंधित पक्ष ने सीमांकन का हवाला दिया, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोई भी निर्माण स्वीकार नहीं होगा।

ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर चेतावनी दी है कि जब तक कार्य पर रोक नहीं लगेगी, आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मांग है कि शासकीय व चारागाह भूमि पर चल रहे निर्माण को तत्काल रोका जाए, अवैध वृक्ष कटाई और डंपिंग की जांच हो तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने साफ कहा, “यह सिर्फ जमीन नहीं, गांव के अधिकार और अस्तित्व का सवाल है।”

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