जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम: स्कूलों में 6 अंतरे अनिवार्य, सिनेमाघरों को छूट

दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय के 28 जनवरी के आदेश के अनुसार, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा। यदि वंदे मातरम और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों साथ में गाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान सभी व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा।

नए नियमों के तहत सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत वंदे मातरम के गायन से होगी, जिसके बाद ही पढ़ाई शुरू की जाएगी। अब राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे पूरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है। पहले केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे। राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन, झंडारोहण, राष्ट्रीय संबोधनों और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों में भी वंदे मातरम का गायन अनिवार्य किया गया है। हालांकि, सिनेमाघरों को इन नियमों से छूट दी गई है। फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगीत बजाना या दर्शकों का खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।

वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में की थी, जो बाद में उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुई। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार इसे सार्वजनिक रूप से गाया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशभक्ति और संघर्ष का प्रतीक बन गया।

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष झांकी निकाली गई, जिसे सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार मिला। केंद्र सरकार का मानना है कि इन नए निर्देशों से राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक मजबूत होगी।

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