दिल्ली। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस संगठन में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी ने राज्य के 71 ब्लॉकों में अध्यक्ष नियुक्त किए हैं, लेकिन इनमें एक भी महिला को जगह नहीं दी गई। इस फैसले के बाद महिला प्रतिनिधित्व को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठने लगे हैं और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष ने विरोध जताया था। अब उसी पार्टी पर अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त अवसर न देने का आरोप लग रहा है। राज्य में महिलाओं की आबादी करीब 50% है, लेकिन संगठनात्मक पदों पर उनकी भागीदारी शून्य रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से 17 ब्लॉक अध्यक्ष बनाए गए हैं, जो उनकी आबादी के अनुपात के करीब है। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से 8 अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी को एक भी योग्य महिला नेता नहीं मिली या फिर यह महिलाओं की अनदेखी का मामला है।
इन नियुक्तियों के बाद पार्टी के भीतर ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विप्लव ठाकुर ने फैसले को जल्दबाजी में लिया गया कदम बताया है। उनका कहना है कि संगठन को मजबूत करने के बजाय सिफारिश के आधार पर नियुक्तियां की गईं, जिससे जमीनी संतुलन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि प्रभारी केवल शिमला तक सीमित रहती हैं और अन्य जिलों में जाकर फीडबैक नहीं लेतीं। इससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती। कुल मिलाकर, इस पूरे विवाद ने कांग्रेस संगठन के भीतर महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब पार्टी को देना पड़ सकता है।
