रायपुर। राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां कहीं भी गुणवत्ता या मापदंड में गड़बड़ी सामने आई है, वहां सुधार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर साड़ियां बदली जाएंगी।
विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार के प्रावधान के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को हर साल दो साड़ियां यूनिफॉर्म के रूप में दी जाती हैं, जिसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपए निर्धारित हैं। इसी आधार पर राज्य में लगभग 1.94 लाख साड़ियों की आपूर्ति छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी को सौंपी गई थी। साड़ी की लंबाई 5.50 मीटर और ब्लाउज पीस सहित कुल लंबाई 6.30 मीटर तय की गई थी।
साड़ी वितरण से पहले गुणवत्ता की जांच राइट्स लिमिटेड, मुंबई से कराई गई, जिसमें सैंपल मानकों पर खरे पाए गए। हालांकि वितरण के बाद दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों से कुछ शिकायतें सामने आईं, जिनमें साड़ी छोटी होने, धागा निकलने और रंग छोड़ने की बात कही गई।
इन शिकायतों के बाद विभाग ने जांच समिति गठित कर जांच कराई, जिसमें कुछ मामलों में लंबाई कम और बुनाई में खामियां पाई गईं। विभाग ने बताया कि कॉटन साड़ी होने के कारण पहली धुलाई में रंग छोड़ने की समस्या कुछ जगहों पर आई, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों को साड़ियों की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित एजेंसी को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जहां भी कमी मिले, वहां साड़ियों को बदलकर मानक के अनुरूप नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएं। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी हितग्राही के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी को गुणवत्तापूर्ण सामग्री दी जाएगी।
