रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना ‘बंदर’ से किए जाने पर साहू समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
इस टिप्पणी को समाज ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। छत्तीसगढ़ साहू समाज ने प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया है और भूपेश बघेल से 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष नीरेन्द्र साहू ने बताया कि 5 जनवरी को इस पूरे मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि तय समय सीमा के भीतर माफी नहीं मांगी गई तो समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा। समाज ने सभी जिलाध्यक्षों को पत्र जारी कर अपने-अपने जिलों में ज्ञापन सौंपने के निर्देश भी दिए हैं।
दरअसल, 29 दिसंबर को बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने लिंगियाडीह क्षेत्र में बस्ती उजाड़े जाने के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम अरुण साव पर तीखा हमला बोला था।
इसी दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ी में जंगल की एक कहानी के जरिए कहा था—‘जंगल के सब राजा मन मिल के बेंदरा ल राजा बना दिन’, जिसे डिप्टी सीएम अरुण साव से जोड़कर देखा गया। बघेल ने यह भी आरोप लगाया था कि साव के अधीन नगरीय निकाय, PWD और जल जीवन मिशन जैसे विभागों में काम नहीं हो रहा है।
इस बयान को साहू समाज ने सीधे तौर पर समाज और उनके गौरव का अपमान बताया है। नीरेन्द्र साहू ने कहा कि “डिप्टी सीएम अरुण साव हमारे समाज के सम्मान हैं। इस तरह की भाषा न केवल राजनीतिक मर्यादा को तोड़ती है, बल्कि समाज की भावनाओं को भी आहत करती है।”
वहीं, इस पूरे विवाद पर अरुण साव की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल जैसे वरिष्ठ नेता को शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। राजनीति में विरोध हो सकता है, लेकिन भाषा संयमित और गरिमापूर्ण होनी चाहिए।
अब साहू समाज की चेतावनी के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भूपेश बघेल इस पर क्या रुख अपनाते हैं या मामला आंदोलन की ओर बढ़ता है।
