PRSU प्रशासन ने RSS प्रचारक को मुख्य वक्ता बनाया, NSUI का विरोध; कुलपति के नाम की नई प्लेट लगाई

रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में एक शासकीय कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े पदाधिकारी को मुख्य वक्ता बनाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे अकादमिक तटस्थता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक भवन पर कुलपति के नाम की नई पट्टिका लगाई, जिस पर पदनाम के साथ “RSS कार्यकर्ता” लिखा गया।

एनएसयूआई के प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल ने आरोप लगाया कि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को सुनियोजित तरीके से RSS का वैचारिक मंच बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 21 जनवरी 2026 को आयोजित “श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ लोकार्पण समारोह” में RSS के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया, जो विश्वविद्यालय की शासकीय मर्यादाओं के विपरीत है।

एनएसयूआई का कहना है कि RSS कोई शैक्षणिक संस्था नहीं बल्कि एक वैचारिक संगठन है। ऐसे संगठन से जुड़े पदाधिकारी को शासकीय विश्वविद्यालय के मंच से मुख्य वक्ता बनाना विचारधारात्मक प्रचार की श्रेणी में आता है। संगठन ने इसे संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ करार दिया।

प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई सवाल उठाए। संगठन ने पूछा कि किस नियम या वैधानिक प्रावधान के तहत RSS पदाधिकारी को मुख्य वक्ता बनाया गया। साथ ही यह भी सवाल किया गया कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन मानता है कि केवल एक ही विचारधारा से जुड़े लोग ज्ञान और संस्कृति के प्रतिनिधि हैं, जबकि अन्य शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को अवसर नहीं दिया जाता।

एनएसयूआई ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस निर्णय पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टता दे और भविष्य में सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में राजनीतिक या वैचारिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों को मुख्य वक्ता या मुख्य अतिथि बनाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। इस प्रदर्शन में मोनू तिवारी, गवेश साहू, अंकित बंजारे, सुजीत सुमेर, मनीष बंधे, शेख अरसलान, आलोक खारे सहित कई छात्र नेता मौजूद रहे।

Exit mobile version