जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का सुदूर वनांचल अबूझमाड़, जो कभी संघर्ष और दुर्गमता के लिए जाना जाता था, अब अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से देश का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
शनिवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के शुभारंभ समारोह में अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी के नन्हे खिलाड़ियों ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के समक्ष मल्लखंब की अद्भुत और साहसिक प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी के सामने मल्लखंब का प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों के साथ बच्चों ने जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक का परिचय दिया। उनकी प्रस्तुति देख दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु बच्चों की प्रतिभा से बेहद प्रभावित नजर आईं। उन्होंने ताली बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके साहस, अनुशासन व कला की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस सफलता के पीछे नारायणपुर जिले के कुटूर, करपा और परपा जैसे दुर्गम इलाकों से आए बच्चों का अथक परिश्रम और संघर्ष छिपा है। सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।
एकेडमी के संस्थापक मनोज प्रसाद, जो 16वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में कार्यरत हैं, के मार्गदर्शन में इन नन्हे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बनाई है। ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ का खिताब जीतने और ‘रोमानियाज गॉट टैलेंट’ में उपविजेता रहने के बाद अब उनकी नजर ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ और ‘ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट’ जैसे वैश्विक मंचों पर है।
जगदलपुर में हुआ यह प्रदर्शन न केवल अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी, बल्कि पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है, जो ‘बदलते बस्तर’ की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करता है।
