बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों से जारी नक्सलवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
सुरक्षा बलों के कड़े प्रहार और रणनीतिक कौशल के कारण नक्सलियों का शीर्ष ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बस्तर संभाग का 96% क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है, और संगठन में DKSZC स्तर या उससे ऊपर का कोई भी बड़ा कमांडर सक्रिय नहीं बचा है।
जारम पुलिस कैंप हटाया गया
शांति की बहाली का सबसे बड़ा प्रमाण दंतेवाड़ा जिले से मिला है, जहाँ कटेकल्याण मार्ग पर स्थित जारम कैंप को हटा लिया गया है। यह इलाका कभी नक्सलियों की रसद सप्लाई का मुख्य केंद्र था।
गृहमंत्री विजय शर्मा के अनुसार, अब इन कैंपों की जगह आदिवासियों के लिए सुविधा केंद्र खोले जाएंगे। सुकमा और अन्य जिलों से भी जल्द ही कैंप हटाने की तैयारी है।
आंकड़ों में नक्सलियों का सिमटता दायरा
बस्तर संभाग के 1100 गांवों में से लगभग 1000 गांवों में पिछले एक साल से कोई नक्सली गतिविधि दर्ज नहीं की गई है। सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि अब पूरे संभाग में केवल 38 सक्रिय नक्सली बचे हैं।
विकास और मुख्यधारा की ओर कदम
नक्सलियों की समानांतर ‘जनताना सरकार’ का अंत हो चुका है और प्रशासन की पकड़ मजबूत हुई है। जनवरी 2024 से अब तक 2,600 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
सरकार ने घोषणा की है कि नक्सल मुक्त घोषित होने वाले गांवों को विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये की विशेष राशि दी जाएगी। 31 मार्च की डेडलाइन के बाद बस्तर को पूरी तरह मुक्त घोषित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
