रायपुर। 19 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ विधानसभा ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह कानून समाज के कमजोर वर्गों को ढाल प्रदान करेगा और अवैध धर्मांतरण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाएगा।
पारदर्शिता के साथ अब ‘कठोर दंड’ का प्रावधान
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि पुराना कानून अवैध गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह सक्षम नहीं था। नए विधेयक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं:
पूर्व सूचना अनिवार्य: अब धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित पक्षों को प्राधिकृत अधिकारी (Dist. Magistrate) को सूचित करना होगा।
सार्वजनिक जांच: आवेदन मिलने पर उसकी सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समय में परीक्षण किया जाएगा। यह सुनिश्चित होगा कि धर्मांतरण बिना किसी दबाव या लालच के हो रहा है।
सख्त कार्रवाई: भ्रम फैलाकर या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ अब कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक ताने-बाने की रक्षा
सीएम साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से प्रलोभन और दबाव के जरिए धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ी थीं, जिससे सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा था। उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि धर्मांतरण के विरुद्ध उनका अभियान आज भी समाज के लिए प्रेरणा है।
आस्था और समरसता को बल
हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की पूर्व संध्या पर इस विधेयक के पारित होने को मुख्यमंत्री ने शुभ संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी की व्यक्तिगत आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘अवैध’ और ‘अनैतिक’ तरीकों के खिलाफ है।

