हिंसा छोड़ मुख्यधारा की ओर बढ़ते कदम,कांकेर बना प्रशिक्षण के बाद रोजगार देने वाला पहला जिला

कांकेर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले ने नक्सलवाद की राह छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के पुनर्वास की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। जिला प्रशासन की अनूठी पहल के चलते कांकेर अब आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल पीड़ितों को प्रशिक्षित कर सीधे रोजगार मुहैया कराने वाला प्रदेश का पहला जिला बन गया है।

कलेक्टर ने सौंपे नियुक्ति पत्र

बुधवार सुबह कलेक्टर कार्यालय में एक गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने चार युवाओं को निजी फर्मों के नियुक्ति पत्र सौंपे। इन लाभार्थियों में आत्मसमर्पित माओवादी सगनूराम आंचला के साथ नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। इन सभी युवाओं को अब 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय के साथ अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी।

मुल्ला (चौगेल) कैंप में मिला ‘पुनर्जीवन’

इन युवाओं को भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) स्थित कैंप में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया। आत्मसमर्पित सगनूराम आंचला ने भावुक होते हुए बताया कि शिक्षा के अभाव में वे भटक कर संगठन से जुड़ गए थे, लेकिन मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें जीवन के वास्तविक रंगों और खुशियों की पहचान हुई है। वहीं, बीरसिंह मंडावी ने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति ने उन्हें कौशल सिखाकर स्वावलंबी बनाया है।

प्रशासन की विशिष्ट पहल

यह शासन की एक ऐसी सकारात्मक कवायद है, जहाँ केवल आत्मसमर्पण तक सीमित न रहकर, युवाओं की प्रतिभा को तराशने और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कांकेर जिले की इस सफलता ने बस्तर संभाग के अन्य जिलों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। प्रशासन का मानना है कि जब हाथ में हुनर और रोजगार होगा, तो हिंसा की राह खुद-ब-खुद बंद हो जाएगी।

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