कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव का बेटा रिकॉर्ड में फरार, लेकिन खुला घूमने के आरोप: अब सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी

रायपुर। स्मार्ट सिटी और नवा रायपुर में 500 करोड़ रुपए के सरकारी काम दिलाने का झांसा देकर 15 करोड़ रुपए की कथित ठगी के मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले के नामजद आरोपी कंचन श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तेलीबांधा थाना पुलिस से केस डायरी तलब की, जिसे पुलिस ने भेज दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस रिकॉर्ड में कंचन श्रीवास्तव पिछले एक वर्ष से फरार और वांटेड बताया जा रहा है, जबकि पुलिस उसे पहले ही हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष जून में पुलिस कंचन को वाराणसी से रायपुर लाई थी और दो दिन तक पूछताछ के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उसे छोड़ दिया गया था। इसके बावजूद पुलिस रिकॉर्ड में उसे फरार ही दर्शाया गया।

मामले में कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव और उनके बेटे कंचन श्रीवास्तव के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज है। शिकायतकर्ता दिल्ली के कारोबारी अशोक रावत का आरोप है कि स्मार्ट सिटी और एनआरडीए में 500 करोड़ रुपए के ठेके दिलाने का झांसा देकर उनसे 15 करोड़ रुपए लिए गए। आरोप है कि काम नहीं मिलने पर 3.40 करोड़ रुपए लौटाए गए, जबकि तीन-तीन करोड़ रुपए के तीन चेक ‘स्टॉप पेमेंट’ के कारण बाउंस हो गए। कारोबारी ने रकम वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।

हाल ही में पुलिस ने भोपाल से केके श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर रायपुर लाकर पूछताछ की थी। इसी दौरान कंचन श्रीवास्तव और कांग्रेसी नेता आशीष शिंदे को भी हिरासत में लिया गया था। बाद में केके श्रीवास्तव और आशीष शिंदे को जेल भेज दिया गया, जबकि कंचन को छोड़ दिया गया। अब उसके सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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