दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान में आंतरिक सत्ता संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दोनों के बीच युद्ध रणनीति और उसके प्रभाव को लेकर गंभीर असहमति देखी जा रही है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन को नरमपंथी नेता माना जाता है, जो मौजूदा हालात में तनाव कम करने और आर्थिक सुधारों पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने IRGC की आक्रामक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लगातार हमलों और क्षेत्रीय तनाव से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से गिर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो आने वाले कुछ हफ्तों में आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। यहां तक कि उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया।
वहीं IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी ने राष्ट्रपति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा संकट के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। उनका मानना है कि युद्ध से पहले आवश्यक आर्थिक और प्रशासनिक सुधार नहीं किए गए, जिससे हालात बिगड़े हैं।
इस टकराव के बीच आम जनता भी गंभीर संकट झेल रही है। देश में महंगाई बढ़ रही है, बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हैं और कई सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कई शहरों में एटीएम खाली हैं और ऑनलाइन लेनदेन बार-बार बाधित हो रहा है।
इन हालातों ने सत्ता के भीतर दरारों को उजागर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव बढ़ता है, तो आने वाले समय में तख्तापलट जैसे बड़े राजनीतिक बदलाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
