शारदीय नवरात्रि विशेष…52 शक्तिपीठों में शामिल मां दंतेश्वरी….जहां गिरा था माता सती का दांत….जानिए दंतेश्वरी मंदिर के बारे में

दंतेवाड़ा। भारत में 52 शक्तिपीठ हैं..प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब दक्ष पुत्री सती की मौत के बाद भगवान शिव काफी क्रोधित थे.तो उनके गुस्से को शांत करने के लिए विष्णु भगवान ने सती के मृत देह को कई भागों में विभाजित कर दिए. जहां जहां पर सती के अंग गिरे वो शक्तिपीठ कहलाए. इनमें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर… जहां माता सती का दांत गिरा था..जो कि हिंदुओं और विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है…यह प्राचीन मंदिर डाकिनी और शाकिनी नदी के संगम पर स्थित है…मंदिर का कई बार निर्माण हो चुका है..लेकिन मंदिर का गर्भगृह लगभग 800 सालों से भी पुराना है…छत्तीसगढ़ समेत पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए मां दंतेश्वरी का मंदिर सर्वाधिक महत्व रखता है…चालुक्य राजाओं ने मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में कराया था.. मंदिर पूरे 4 भागों में विभाजित है.. इस मंदिर के अवयवों में गर्भगृह, महा मंडप, मुख्य मंडप और सभा मंडप शामिल हैं. गर्भगृह और महामंडप का निर्माण पत्थरों से किया गया है…

ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित मंदिर में काले रंग की प्रतिमा स्थापित है…प्रतिमा 6 भुजाओं वाली है…इनमें से दाईं ओर की भुजाओं में देवी ने शंख, खड्ग और त्रिशूल धारण कर रखे हैं जबकि बाईं ओर देवी के हाथों में घंटी, पद्म और राक्षसों के बाल हैं… प्रतिमा नक्काशीयुक्त है…जिसके ऊपरी भाग में भगवान नरसिंह अंकित हैं… इसके अलावा देवी की प्रतिमा के ऊपर चाँदी का एक छत्र है…

होली से पहले यहाँ नौ दिवसीय फाल्गुन मड़ई नामक त्यौहार का आयोजन होता है। यह त्यौहार पूर्ण रूप से आदिवासी संस्कृति और जनजातीय विरासत से सुसज्जित त्यौहार है। इस त्यौहार के दौरान हर दिन माता दंतेश्वरी की डोली लगभग 250 देवी-देवताओं के साथ नगर भ्रमण पर निकलती हैं। आदिवासी समुदाय नृत्य आदि के द्वारा इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं। हर साल नवरात्रि के दौरान पंचमी तिथि को यहाँ गुप्त पूजा का आयोजन किया जाता है। इस अनुष्ठान में मात्र मंदिर के पुजारी और उनके सहयोगी ही उपस्थित रहते हैं। आम लोगों को इस दौरान मंदिर में प्रवेश की मनाही होती है।

Exit mobile version