दुर्ग। गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर बड़ा बयान दिया है।
दुर्ग दौरे पर पहुंचे शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया था, बल्कि तामझाम और अव्यवस्था के कारण उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
शंकराचार्य निश्चलानंद हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत बुधवार को दुर्ग पहुंचे। यहां उन्होंने भक्तों से मुलाकात की और आध्यात्मिक विषयों पर प्रवचन देने की बात कही। इस दौरान मीडिया से चर्चा में उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में हुए घटनाक्रम पर भी प्रतिक्रिया दी।
गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है और काशी के लिए रवाना हो गए हैं। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि मन इतना व्यथित है कि वे बिना स्नान किए ही लौट रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सनातनी प्रतीकों का अपमान हुआ है और प्रशासन को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।
इस मामले ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है। वकील गौरव द्विवेदी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन भेजकर CBI जांच की मांग की है। माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा, लेकिन विवाद के कारण शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 दिन पहले ही मेला छोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि 18 जनवरी को स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोकी थी, जिसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसी घटना के बाद विवाद गहराता चला गया।
