रायपुर। 31 मार्च 2026 की निर्धारित समय-सीमा तक भारत को नक्सल-मुक्त करने के लक्ष्य पर संसद में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। अमित शाह ने दावा किया कि सरकार ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है, जबकि बघेल ने शाह के आरोपों को ‘सरासर झूठ’ करार दिया।
अमित शाह के 3 बड़े दावे और आरोप
- कांग्रेस पर संरक्षण का आरोप: शाह ने सीधा हमला करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने नक्सलियों को बचाकर रखा। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा, “भूपेश बघेल को पूछो, प्रूफ दूं क्या?” शाह के अनुसार, 2023 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद ही ऑपरेशंस में तेजी आई।
- नक्सलवाद का अंत: गृह मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए हैं और 4,800 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया है। अब देश में केवल दो जिले नक्सल प्रभावित बचे हैं और बस्तर विकास के पथ पर है।
- विचारधारा पर प्रहार: शाह ने उन लोगों की आलोचना की जो नक्सलियों की तुलना भगत सिंह या बिरसा मुंडा से करते हैं। उन्होंने इसे “हिमाकत” बताते हुए कहा कि ये लोग संविधान तोड़कर निर्दोषों की हत्या करते हैं।
भूपेश बघेल का पलटवार
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सोशल मीडिया पर जवाब दिया:
- सबूत की मांग: बघेल ने कहा कि यदि केंद्र के पास कोई आपत्ति थी, तो उसे पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उन्होंने शाह के बयान को “सरासर झूठ” बताया।
- राजनीति न करने की सलाह: बघेल ने तर्क दिया कि उनकी सरकार ने ही बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित किए थे, जिसके बिना वर्तमान ऑपरेशन संभव नहीं होते। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने झीरम घाटी जैसे हमलों में अपने शीर्ष नेताओं को खोया है, इसलिए उन पर नक्सलियों को बचाने का आरोप निराधार है।
वर्तमान स्थिति
गृह मंत्रालय के अनुसार, बस्तर के हर गांव तक अब राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं। शाह ने स्पष्ट किया कि ‘अर्बन नक्सलियों’ की मानवता केवल हथियार उठाने वालों के लिए है, जबकि सरकार की प्राथमिकता उन आम नागरिकों की सुरक्षा है जो इस हिंसा का शिकार होते रहे हैं।
