पटना। बिहार की राजनीति में ‘जंगलराज’ का मुद्दा लंबे समय तक गूंजता रहा। विपक्षी दल अक्सर लालू प्रसाद यादव के शासनकाल पर सवाल उठाते थे। इसी दौर में राजधानी पटना से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया जिसने पूरे देश को हिला दिया और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
घटना का विवरण
यह मामला 1995 का है। 1982 बैच के एक IAS अधिकारी की शादी 1990 में हुई थी। 1995 में सचिव स्तर पर तैनाती मिलने के बाद उनका परिवार पटना के बेली रोड स्थित सरकारी आवास में रहने लगा। उसी समय राजद विधायक हेमलता यादव को बिहार समाज कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया और उन्हें IAS अफसर के बगल वाला मकान अलॉट हुआ। उनके साथ उनका 27 वर्षीय बेटा मृत्युंजय यादव भी रहने लगा।
7 सितंबर 1995 को हेमलता यादव ने IAS अफसर की पत्नी को अपने घर बुलाया। आरोप है कि कमरे में बंद कर उनके बेटे मृत्युंजय ने दुष्कर्म किया। इसके बाद धमकाकर पीड़िता को चुप कराया गया। इसके बाद आरोपियों ने अफसर की मां, भतीजी और नौकरानियों को भी शिकार बनाया। यह सिलसिला करीब दो वर्षों तक (1995-1997) चलता रहा। आरोप यह भी लगे कि पीड़िता की नसबंदी करवा दी गई।
मामला सार्वजनिक और गिरफ्तारी
काफी समय तक चुप रहने के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस को शिकायत दी। कार्रवाई न होने पर भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे सार्वजनिक किया और लालू सरकार पर जंगलराज फैलाने का आरोप लगाया। 1997 में राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी के हस्तक्षेप से मृत्युंजय को गिरफ्तार किया गया। हेमलता यादव कुछ समय फरार रहने के बाद सरेंडर कर गईं। निचली अदालत ने मृत्युंजय को 10 साल और हेमलता को 3 साल की सजा सुनाई।
हाईकोर्ट का फैसला और बाद की स्थिति
पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटकर दोनों को बरी कर दिया। कोर्ट ने सवाल उठाए कि पीड़िता ने 2 साल तक चुप्पी क्यों साधी। बाद में IAS अफसर झारखंड चले गए और वहीं निधन हो गया। उनकी पत्नी गुमनामी में जीवन बिता रही हैं। हेमलता यादव का राजनीतिक करियर खत्म हो गया, जबकि मृत्युंजय के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस मामले ने बिहार में उस दौर के कानून-व्यवस्था और जंगलराज पर सवाल खड़े कर दिए थे।