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जल संरक्षण से आत्मनिर्भर किसान, चिड़ौला में शक्तिगत कूप बना ग्रामीण समृद्धि की मिसाल

रायपुर। ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण और जल शक्ति अभियान जैसी योजनाएं भू-जल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ किसानों और महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इसी कड़ी में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है, जहां शक्तिगत कूप निर्माण ने गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी है।

ग्राम पंचायत चिड़ौला में जयबहादुर सिंह के लिए शक्तिगत कूप निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई।

कूप निर्माण से पहले किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे सिंचाई की अनिश्चितता बनी रहती थी और फसल उत्पादन प्रभावित होता था। पानी की कमी के कारण समय पर बुवाई और सिंचाई संभव नहीं हो पाती थी, जिससे आय भी सीमित रहती थी।

कूप निर्माण के बाद खेतों तक नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित हुई, जिससे समय पर सिंचाई संभव हो सकी।

इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार के रूप में सामने आया है। अब किसान दोहरी फसल लेने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। जल उपलब्धता से खेती अधिक सुरक्षित, लाभकारी और टिकाऊ बन गई है।

यह कूप केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। इससे भू-जल संरक्षण, जल का समुचित उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं गांवों के समग्र विकास और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होती हैं।

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