देश के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट में बदलेगी सुरक्षा तकनीक, सॉफ्टवेयर पर निर्भरता घटेगी

कुडनकुलम में रूसी हार्डवेयर आधारित सिस्टम लगाया जा रहा; साइबर हमलों और सॉफ्टवेयर क्रैश से सुरक्षा पर जोर

दिल्ली। भारत के सबसे बड़े परमाणु बिजली संयंत्र कुडनकुलम में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है।

तमिलनाडु स्थित इस संयंत्र में रूस की परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम ने हार्डवेयर आधारित सुरक्षा उपकरणों के करीब 300 सेट भेजे हैं। इस तकनीक का उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों की सॉफ्टवेयर और माइक्रोप्रोसेसर पर निर्भरता कम करना है, ताकि तकनीकी गड़बड़ी या साइबर हमले की स्थिति में भी अहम सुरक्षा कार्य जारी रह सकें।

बिना सॉफ्टवेयर काम करेंगे सुरक्षा उपकरण

नई तकनीक में नॉन-प्रोग्रामेबल मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा। ये उपकरण प्रोग्रामिंग के बजाय हार्डवेयर सर्किट के आधार पर काम करेंगे। इससे सॉफ्टवेयर में बग, ऑपरेटिंग सिस्टम क्रैश या डिजिटल सिस्टम में गड़बड़ी से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने का जोखिम कम हो सकता है।

जरूरी जांच पूरी होने के बाद इन उपकरणों को कुडनकुलम संयंत्र की यूनिट-3 और यूनिट-4 की सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। पहली दो इकाइयों से मिले अनुभव के आधार पर नई इकाइयों की सुरक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है।

आपात स्थिति में रिएक्टर को सुरक्षित करने में मदद

परमाणु संयंत्र में तापमान या दबाव निर्धारित सीमा से अधिक होने पर सुरक्षा प्रणाली आपातकालीन उपकरणों को सक्रिय करने के संकेत देती है। नई हार्डवेयर आधारित तकनीक का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा संबंधी कार्रवाई को अधिक भरोसेमंद बनाना है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता संबंधित परीक्षणों और सुरक्षा मानकों पर निर्भर करेगी।

साइबर हमलों से बचाव पर जोर

परमाणु संयंत्रों में डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा गंभीर माना जाता है। पिछले एक दशक में दो बड़े साइबर हमलों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। सॉफ्टवेयर पर निर्भरता घटाने से कुछ तरह के डिजिटल हमलों का जोखिम कम हो सकता है, लेकिन इससे साइबर खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं होते। नेटवर्क सुरक्षा, निगरानी और नियमित जांच भी जरूरी हैं।

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