सक्ती। सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के बाद का मंजर दिल दहला देने वाला है। हादसे के बाद जहां कई मजदूरों की जान चली गई, वहीं उनके परिजन रातभर अपने अपनों की तलाश में अस्पतालों और सड़कों पर भटकते रहे। जांजगीर-चांपा जिले के हरदी विशाल गांव निवासी सनी कुमार अनंत अपने भाई को ढूंढते-ढूंढते पूरी रात अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कहीं भी कोई जानकारी नहीं मिल पाई।
सनी ने बताया कि शाम 4 बजे से तलाश शुरू की थी और रात के 3 बजे तक 5 से 6 अस्पतालों में जाकर देखा, यहां तक कि ICU में भी खोजबीन की, लेकिन भाई का नाम कहीं नहीं मिला। उनके भाई रामेश्वर महिलांगे वेदांता प्लांट में बॉयलर ऑपरेटर थे। हादसे के बाद उनका मोबाइल भी बंद आ रहा था। बाद में दोस्तों से घटना की जानकारी मिली और फिर तलाश शुरू हुई। सुबह होते-होते उनके भाई की मौत की खबर आई, जिससे पूरा परिवार सदमे में आ गया।
हादसे के 12 से 20 घंटे बाद भी प्लांट प्रबंधन या प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की कोई स्पष्ट सूची जारी नहीं की गई। इससे परिजनों की परेशानी और बढ़ गई। लोग भूखे-प्यासे अस्पतालों के बाहर भटकते रहे, लेकिन कोई अधिकारी सही जानकारी देने सामने नहीं आया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट प्रबंधन ने ठहरने के लिए होटल भेजा, लेकिन वहां भी उनसे पैसे मांगे गए। काफी बहस के बाद ही उन्हें कमरा मिल पाया। इस दौरान कई परिवारों को अपने प्रियजनों की स्थिति तक का पता नहीं चल सका।
घटना के बाद प्रबंधन की लापरवाही भी सामने आई। देर रात तक कुछ शव प्लांट परिसर में ही एंबुलेंस में रखे रहे। भीड़ के डर से उन्हें बाहर नहीं निकाला गया। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल सिस्टम की तैयारी पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पीड़ित परिवारों के दर्द को भी और बढ़ा दिया है।
