समाज प्रमुखों के साथ RSS प्रमुख की गुप्त बैठक: भागवत बोले– घर में हिन्दी में बात करें, शास्त्र-संविधान पढ़ें; लव जिहाद-मतांतरण पर भी चर्चा

रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में गुरुवार को रायपुर के श्रीराम मंदिर परिसर में एक गुप्त सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की गई।

बैठक में प्रदेशभर के विभिन्न समाज, जाति और पंथ से जुड़े लगभग 500 प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में मीडिया और बाहरी व्यक्तियों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रही। सिर्फ संघ के चुनिंदा प्रचारक और आमंत्रित समाज प्रमुख ही मौजूद थे।

संघ के प्रचार विचार विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. भागवत ने कहा कि भारत में विविध आस्थाओं के बावजूद समाज सदियों से परस्पर सम्मान और सद्भाव के साथ एकजुट रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे यहां घर में काम करने वाले को भी बच्चे ‘चाचा’ कहकर सम्मान देते हैं, यही भारतीय समाज की आत्मा है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेज भारत को स्वेच्छा से छोड़कर नहीं गए, बल्कि हमारे पूर्वजों की संगठित शक्ति ने उन्हें जाने पर मजबूर किया। विदेशी शासकों ने हमारी सामाजिक एकता तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय समाज ने हर दौर में उन्हें असफल किया।

बैठक में लव जिहाद, मतांतरण और नशे जैसी सामाजिक चुनौतियों पर लंबी चर्चा हुई। डॉ. भागवत ने कहा कि अकेलापन व्यक्ति को व्यसन की ओर ले जाता है, इसलिए समाज को एक-दूसरे का संबल बनना होगा और इन विषयों पर निरंतर प्रबोधन जरूरी है।

उन्होंने वंचित और दुर्बल वर्गों के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि समर्थ वर्गों को अपनी शक्ति समाज के हित में लगानी चाहिए। सरसंघचालक ने चार प्रमुख कार्यों का आह्वान किया—परिवार प्रबोधन के तहत सप्ताह में एक दिन परिवार संग संवाद, पर्यावरण संरक्षण, घर में हिन्दी व मातृभाषा का प्रयोग और भारतीय वेशभूषा को बढ़ावा, साथ ही संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार व नागरिक कर्तव्यों की जानकारी रखना।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. भागवत ने विभिन्न समाज प्रमुखों के साथ पंगत में बैठकर भोजन किया और सेवा कार्यों के अनुभव साझा किए, जो सामाजिक समरसता का प्रतीक रहा।

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