रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के तहत रायपुर रेल मंडल को आने वाले वर्षों में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट मिलने जा रहा है।
यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और रायपुर स्टेशन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नया रायपुर (केंद्री) में वैकल्पिक कोचिंग टर्मिनल विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। इसके पूरा होने से रायपुर स्टेशन की भीड़ कम होगी और नई ट्रेनों के संचालन की राह आसान बनेगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में यात्रियों की मांग को देखते हुए कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार जरूरी है, जिससे नेटवर्क मजबूत होगा और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा।
रायपुर बिलासपुर-नागपुर सेक्शन पर स्थित एक अहम जंक्शन है, जहां से प्रतिदिन 122 कोचिंग ट्रेनें संचालित होती हैं। इनमें 76 मेल-एक्सप्रेस और 46 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। स्टेशन पर सिर्फ 7 प्लेटफॉर्म हैं, वहीं 14 ट्रेनें दुर्ग से होकर शुरू होती हैं, जिससे परिचालन दबाव लगातार बढ़ रहा है।
इसी दबाव को कम करने के लिए रेलवे ने नया रायपुर (केंद्री) को भविष्य के कोचिंग हब के रूप में चुना है।
प्रस्तावित टर्मिनल में 9 प्लेटफॉर्म, एक होम प्लेटफॉर्म, 4 आइलैंड प्लेटफॉर्म, 5 पिट लाइन, 5 स्टेबलिंग लाइन, 4 इंटरमीडिएट ओवरहॉलिंग लाइन, 4 मेकेनिकल लाइन और 3 शंटिंग नेक विकसित किए जाएंगे। इससे रायपुर क्षेत्र की कोचिंग क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
इसके साथ ही दुर्ग में 50 करोड़ रुपये की लागत से वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो बनेगा, जहां हाई-स्पीड ट्रेनों का रखरखाव होगा।
रायपुर स्टेशन का 456 करोड़ से वर्ल्ड क्लास रीडेवलपमेंट, बिलासपुर-नागपुर चौथी लाइन और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग जैसे प्रोजेक्ट मिलकर 2030 तक रायपुर की ट्रेन क्षमता को दोगुना करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
