रायपुर। रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे 30 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 1600 करोड़ रुपये का बजट पेश करने जा रही हैं। इस बार का बजट लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान और राजस्व वृद्धि के कड़े फैसलों पर केंद्रित नजर आ रहा है।
नए टैक्स और सफाई शुल्क का प्रावधान
बजट की सबसे बड़ी चर्चा नए करों को लेकर है। निगम के इतिहास में पहली बार भंडारा, लंगर और सार्वजनिक प्रसादी वितरण करने वाले आयोजकों को 500 रुपये प्रतिदिन का सफाई शुल्क देना होगा। अधिकारियों का तर्क है कि ऐसे आयोजनों के बाद फैलने वाले कचरे को साफ करने में निगम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
इसके अलावा, शहर में लगने वाले मीना बाजार, जादूगर शो, एक्सपो और प्रदर्शनियों पर भी टैक्स का शिकंजा कसा गया है। अब चाहे जमीन निजी हो या सरकारी, आयोजकों को प्रति 10 हजार वर्गफीट के हिसाब से 500 रुपये प्रतिदिन टैक्स देना अनिवार्य होगा।
महिला सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर फोकस
इस बजट में ‘आधी आबादी’ के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं:
- फ्री सिटी बस सफर: महिलाओं के लिए सिटी बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा संभावित है।
- डिजिटल सुरक्षा: महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई डिजिटल योजनाओं और मोबाइल ऐप्स पर बड़ा फंड खर्च किया जाएगा।
- प्रोफेसर कॉलोनी का समाधान: सालों से जलभराव की समस्या झेल रही प्रोफेसर कॉलोनी के लिए विशेष ड्रेनेज प्लान और फंड का प्रावधान किया गया है।
प्रमुख एजेंडे और विकास की दिशा
बजट सत्र के दौरान 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होगी, जिसमें शहीद एएसपी आकाश राव गिरेपुंजे और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अयोध्या प्रसाद के नाम पर मार्गों का नामकरण शामिल है।
महापौर मीनल चौबे का कहना है कि यह बजट “हवा-हवाई” वादों के बजाय बिजली, पानी और सड़क जैसी धरातलीय समस्याओं को खत्म करने वाला होगा। पिछले साल का बजट 1529 करोड़ का था, जिसकी तुलना में इस बार का बजट थोड़ा बड़ा और अधिक व्यावहारिक बताया जा रहा है।
