देश के कई राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट, दक्षिण भारत में भारी बारिश के आसार

नई दिल्ली। देशभर में मौसम का मिजाज बदल रहा है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय होने से बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में भी अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है।

दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, दक्षिणी कर्नाटक और तटीय आंध्र प्रदेश में 18 अक्टूबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

तमिलनाडु के नीलगिरि, कोयंबटूर, थेनी, डिंडीगुल, तेनकासी और मदुरै सहित कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश और बिजली गिरने की आशंका है।

उत्तर भारत में भी बदलेगा मौसम

दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है।

पहाड़ी इलाकों में मौसम की स्थिति के अनुसार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ सकती है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं से तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में भी स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार बारिश हो सकती है।

देश से मानसून की विदाई पूरी

मौसम विभाग ने 15 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की देशभर से पूरी तरह विदाई की घोषणा की। इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम रही। अब दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिलता है।

बिजली और तेज हवाओं से रहें सावधान

मौसम विभाग ने लोगों को गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। भारी बारिश की आशंका वाले क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। किसानों और यात्रियों को स्थानीय मौसम चेतावनी के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।

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