मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव खारिज,संसद के दोनों सदनों ने नहीं दी मंजूरी

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाया गया महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में खारिज कर दिया गया है। यह प्रस्ताव विपक्षी दलों की ओर से लाया गया था, जिस पर कुल 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। यह फैसला जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत लिया गया, जिसके चलते अब इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।

यह पहली बार था जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए इस तरह का प्रस्ताव संसद में लाया गया। नियमों के अनुसार, लोकसभा में ऐसे प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जो इस मामले में पूरे भी हुए थे।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुछ मामलों में केंद्र सरकार को लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे हैं, खासकर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने चुनाव आयोग पर मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया था।

हालांकि, प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब यह मामला यहीं रुक गया है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज के समान होती है, जिसमें दोनों सदनों की मंजूरी अनिवार्य होती है।

इस फैसले से साफ है कि फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद पर बने रहेंगे और विपक्ष को इस मुद्दे पर नई रणनीति बनानी होगी।

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