नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की तैयारी: अब ज्वेलर्स के पास भी जमा कर सकेंगे सोना, सरकार जल्द कर सकती है बड़ा ऐलान

दिल्ली। केंद्र सरकार जल्द ही नई और अपडेटेड गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) लॉन्च कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले दो सप्ताह के भीतर इस योजना का ऐलान किया जा सकता है। नई व्यवस्था के तहत पहली बार देशभर के ज्वेलर्स और सर्राफा कारोबारियों को भी ‘कलेक्शन पार्टनर’ बनाया जाएगा, जिससे लोग बैंक के अलावा अपने भरोसेमंद ज्वेलर्स के पास भी सोना जमा कर सकेंगे।

अब तक गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत केवल बैंकों के माध्यम से ही सोना जमा किया जा सकता था। नई व्यवस्था का उद्देश्य इस प्रक्रिया को आसान बनाना और अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरों में वर्षों से रखा निष्क्रिय सोना आर्थिक गतिविधियों में शामिल हो सकेगा।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का मानना है कि ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाने से बाजार से 1000 टन से अधिक सोना जुटाया जा सकता है। यदि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा भी इस योजना में शामिल होता है, तो करीब 90 अरब डॉलर (लगभग 8.57 लाख करोड़ रुपये) की पूंजी अर्थव्यवस्था में आ सकती है।

नई स्कीम के तहत लोगों को अपने घर में रखे सोने पर सालाना 2.25% से 2.5% तक ब्याज मिलने की संभावना है। साथ ही बैंक लॉकर का खर्च बचेगा और सोने की सुरक्षा की चिंता भी कम होगी। मैच्योरिटी पूरी होने पर ग्राहक अपनी राशि नकद या फिर फिजिकल गोल्ड के रूप में वापस लेने का विकल्प चुन सकेंगे।

सरकार इस योजना का ढांचा ऐसा बनाने पर भी विचार कर रही है, जिससे पुराने सोने को जमा कराने वालों को टैक्स जांच या पुराने खरीद बिल से जुड़ी परेशानियों का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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